सेल्वी जे जयललिता को श्रद्धांजलि

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Posted by : Aman on | Dec 06,2016

सेल्वी जे जयललिता को श्रद्धांजलि

जयललिता का जन्म 24 फ़रवरी 1948 को एक 'अय्यर' परिवार में, मैसूर राज्य (जो कि अब कर्नाटक का हिस्सा है) के मांडया जिले के पांडवपुरा तालुक के मेलुरकोट गांव में हुआ था। उनके दादा तत्कालीन मैसूर राज्य में एक सर्जन थे। महज 2 साल की उम्र में ही उनके पिता जयराम, उन्हें माँ संध्या के साथ अकेला छोड़ कर चल बसे थे। पिता की मृत्यु के पश्चात उनकी मां उन्हें लेकर बंगलौर चली आयीं, अपने नाना-नानी के पास| ज़िंदगी चलाने के लिए उनकी मां ने तमिल सिनेमा में काम शुरू कर दिया|

उनकी प्रारंभिक शिक्षा पहले बंगलौर और बाद में चेन्नई में हुई। चेन्नई के स्टेला मारिस कॉलेज में पढ़ने की बजाय उन्होंने सरकारी वजीफे से आगे पढ़ाई की और माँ की ज़िद्द के आगे फिल्मों में पढ़ाई के दौरान ही फ़िल्मो में काम करने लगी| फिल्मों के बाद एमआर चंद्रा के साथ 1982 में राजनीति में आ गयी| जिसके बाद उनके राजनैतिक करियर ने कई उँचाइयों को छुआ| जयललिता पहली महिला मुख्यमंत्री है जो पाँच बार इस पदभार को संभाल चुकी है| जयललिता महिला शक्ति के रूप में एक ऐसा नाम है, जो इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से लिखा जाएगा| हृदयगति रुक जाने से 05 दिसम्बर 2016 को इन्होनें अंतिम साँस ली|


1989 के साल, करुणानिधि मुख्यमंत्री थे। वित्त मंत्रालय भी उनके ही पास था| बजट पढ़ा जा रहा था। जयललिता ने करुणानिधि के भाषण में व्यवधान डालते हुए कुत्रावलि यानी अपराधी कहा, जवाब में करुणानिधि ने माइक बंद करके गंदी गाली दे दी| इसके बाद  मार्च 25 को राजनैतिक इतिहास में कुछ ऐसा हुआ था, जिसे आधुनिक समय का "द्रौपदी चीरहरण" कहा गया। जगह थी तमिलनाडु विधानसभा। दोनों के समर्थक विधायक लड़ पड़े। इसी बीच जब कुछ लोग जयललिता को बचाकर बाहर ले जा रहे थे, तभी डीएमके नेता दुरई मुरुगन ने साड़ी का पल्लू खींच दिया।

एक औरत जो बिखरे बाल,अस्त व्यस्त कपड़े के साथ| अभी कुछ ही देर पहले विधानसभा के भीतर काफी कुछ अघटनीय घटा| वह औरत जो कि विपक्ष की नेता थी, के साथ असंसदीय-अमर्यादित व्यवहार हुआ था| औरत गुस्से में कांप रही थी, कह रही थी कि अब विधानसभा में तभी लौटना होगा जब मुख्यमंत्री बन जाऊँ या सदन महिलाओं की मर्यादा सीख जाये।

दो साल बाद राज्य में विधानसभा चुनाव होता है। अघटनीय को अंजाम देने वाली सत्तारुढ़ पार्टी किसी तरह दो सीट जीत पाती है। अख़बार लिखते हैं, पूरा हुआ द्रौपदी का बदला।


यह एक शुरुआत थी उस औरत के शानदार सफर की| शुरआत थी जयललिता जयरामन से अम्मा और पुरत्चि तलइवी हो जाने की| 15 साल की उम्र में जबरन फिल्मों में धकेल दी गयी। 125 फिल्मों में लीड रोल जिनमें 119 फिल्में बड़ी हिट। कई शास्त्रीय नृत्यों में पारंगत। कई गीत भी गायी। ऊब गयी फिल्मों से और टूट गयी प्रेमसंबंध टूटने से तो आत्महत्या की  कोशिश भी करी तब एमजीआर ले आये राजनीति में। विधायक चुनी गयी पर अंग्रेजी समेत कई भाषाओं पर शानदार पकड़ और विद्वता के कारण एमजीआर राज्यसभा भेज दिये। इसी दौरान एमजीआर का निधन हुआ। गुरू और पितातुल्य मानती थी और ऊपर से उस इंसान ने लगभग मौत से खींचकर वापस जिंदा किया था। फिर से टूटी। तेरह घंटे लाश के पास खड़ी रही।

यह सब 1987 की बात। पार्टी के दो टुकड़े हो गये पर 1989 में अम्मा ने वापिस एक किया और राज्य की पहली महिला प्रतिपक्ष नेता चुनी गयी।इसके बाद का इतिहास है।इतिहास नारी के रणचंडी बन जाने का। आठ महीने बाद लोकसभा चुनाव हुआ। जयललिता ने कांग्रेस से गठबंधन किया और यह गठबंधन 39 में से 38 सीट जीत ले गयी। इसी तरह 1991 चुनाव में डीएमके को महज दो सीटें मिली। करुणानिधि अपनी सीट महज 890 वोट से जीत पाये और वह भी शर्म की वजह से इस्तीफा दे दिए|


अब जब जयललिता के निधन की ख़बर आ चुकी हैं और खबरें आ रही हैं कि फलां जगह लोग उत्तेजित हो गये, अस्पताल पर लोगों ने पथराव कर दिया। टीवी पर दिख रहे होंगे लोग मातम मनाते हुए। छाती माथा पीटते लोग। हम सोच रहे हैं,सभी सोच रहे हैं कि यह एक नेता के प्रति जनता की कैसी दीवानगी?

मातम मनाते, रोते-बिलखते जो दिख रहे हैं, थोड़ा गौर करियेगा। बेहद गरीब लोग हैं ये, एकदम हाशिये के लोग।अब "अम्मा कैंटीन" की बात जानिये। जयललिता ने शुरू किया था यह महत्वाकांक्षी और जन कल्याणकारी योजना। इसके तहत शहरों में सस्ते कैंटीन खोले गये। कीमत जानियें, एक रुपये में इडली। पाँच रुपये में सांभर-चावल। तीन रुपये में दही-चावल। इस तरह की कई और भी योजनाएँ। अविश्वसनीय सच है यह। कौन खाता होगा यह खाना? किसे मिली होगी मदद? निश्चित उन्हें ही सबसे ज्यादा, जो आज बिलखते और छाती पीटते दिख रहे हैं। बिलखें भी क्यों न और छाती क्यों न पीटें? उनकी अम्मा मरी है| हर गरीब पेट को खाना सुनिश्चित करने वाली अम्मा। माँ मरने का दर्द तो महसूस कर ही सकते हैं?

"जयललिता या अम्मा" अम्मा कहना ज़्यादा सही होगा|


Visit https://jayalalithaa.tributes.in/ to pay tribute to the departed soul.

 

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