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सिकुड़ते पर्यावासों का पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव

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Posted by : Taaza Khabar News on | Apr 28,2015

सिकुड़ते पर्यावासों का पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव

दुनिया भर में मौजूदा लगभग 70 फीसदी जंगलों के दायरे मात्र आधा मील रह गए हैं। जिसका अर्थ यह है कि शहरीकरण तथा कृषि के लिए उन्हें कभी भी इस्तेमाल किया जा सकता है। एक अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है। वैश्विक पर्यावास विभाजन का विस्तृत अध्ययन साइंस एडवांसेज नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है, जिसके मुताबिक जंगलों में मौजूद पेड़-पौधों तथा दुनिया के पर्यावरण को कई खतरे हैं।
 
शोधकर्ताओं ने दुनिया भर के जंगली क्षेत्र का नक्शा जुटाया और उसमें पाया कि कुछ ही वन क्षेत्र ऐसे हैं, जिनपर किसी प्रकार के मानवीय विकास खतरा नही है।
 
एनसी स्टेट विश्वविद्यालय के लेखक निक हदाद ने कहा, “इसमें कुछ छिपा नहीं है कि दुनिया के जंगल सिकुड़ रहे हैं। दुनिया में शेष लगभग 20 फीसदी जंगलों का दायरा किसी फुटबाल मैदान या लगभग 100 मीटर का रह गया है।”

ऑरः taazakhabarnews.in/सिकुड़ते-पर्यावासों-का-प/

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