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आखिर शिवसेना क्यों करती है भाजपा का विरोध

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Posted by : mumbaihindinews on | Jun 02,2015

आखिर शिवसेना क्यों करती है भाजपा का विरोध

मुंबई : शिवसेना यूँ तो सत्ता में भाजपा के साथ है। भाजपा द्वारा महाराष्ट्र में सरकार बनाने में लगभग कामयाब हो जाने के बाद काफी उलझे हुए घटनाक्रमों और राष्ट्रवादी पार्टी के सुप्रीमों शरद पवार द्वारा उसे बाहर से समर्थन देने की तैयारी दिखाने के उपरान्त, अपनी कथित नाराजगी और झल्लाहट को दरकिनार कर रणनीति को बदलते हुए शिवसेना आनन-फानन में भाजपा सरकार का साथ देने को तैयार हुई थी। तब सभी को लगा था कि शायद सब ठीक हो जायेगा। परन्तु इसके बाद भी अब जब भी मौका मिलता है वह भाजपा सरकार और उसके नेताओं के खिलाफ बयानों की बमबारी करने और उसे आड़े हाथों लेने का एक भी मौका नहीं चूकती। आखिर क्या है इसके पीछे उसकी मंशा या उसका राजनीतिक हथकंडा ? इसी विषय पर हमने भाजपा और कांग्रेस सहित शिवसेना के कई प्रतिष्ठित लोगों से बात करके हर किसी का पक्ष जानना चाहा। आइये देखते हैं क्या कहते हैं देश और शहर के ये जागरूक और जिम्मेदार नेतागण ……    उत्तर मुंबई से सांसद और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता गोपाल शेट्टी ने " मुंबई हिंदी न्यूज़ डॉट कॉम " से विशेष बातचीत में कहा कि ऐसी बयानबाजी शिवसेना के नेतागण क्यों करते हैं ये तो वे ही जानें। मेरा ये स्पष्ट मानना है कि नेता समाज के लिये और जनता के लिए होता है। कोई भी राजनीतिक पार्टी जनता की सेवा के लिए एक निमित्त मात्र होती है। लोकतंत्र में जनता से बड़ा कुछ भी नहीं है। इसलिए उसकी भावनाओं को सभी नेतागण हमेशा और जरूर समझें। जनता ने देश में एक बड़े परिवर्तन की ठानकर भाजपा पर विश्वास किया है और देश के साथ - साथ महाराष्ट्र की भी कमान उसे सौंपी है। ऐसे में साथी दल होने के कारण वे जनता की भावनाओं को साथी दल के लोग समझें और जनहित के लिए बराबरी से योगदान दें । बयानबाजी का फेर ही मेरी राय में ठीक नहीं है । इससे हासिल कुछ नहीं होनेवाला।   उत्तर मुंबई जिला भाजपा के उपाध्यक्ष और तेजतर्रार नेता रामकृपाल उपाध्याय के अनुसार शिवसेना का ऐसा रवैय्या सही नहीं है। इससे जनता में गलत सन्देश जा सकता है। वो पार्टी और उसके नेतागण भाजपा के साथ हैं तो किसी तरह के प्रश्न पर सरकार से या हमारे नेताओं से सीधे बात कर सकते हैं । बयानबाजी से ऐसा ही सन्देश जायेगा कि अब तक वह पार्टी महाराष्ट्र में बड़ा भाई वाली हैसियत में थी, पर अब छोटा भाई बनने के कारण बौखला गई है। घर की बातें प्रचारित करने की जरूरत ही क्या है। हो सकता है आगामी मनपा चुनावों को लेकर वे लोग यह दर्शाने की कोशिश में हों कि जमीन उनके ही हाथ में है। उसके वोटर भटकें नहीं, इसके लिए भी वो पार्टी शायद बयानबाजी की नीति अपनाये हुए है । पर वो हमारे साथ हैं तो हम उन्हें अपना ही मानते हैं।    शिवसेना के युवा नेता भरत सिंह मानते हैं कि भाजपा और शिवसेना में मतभेद हो सकते हैं पर मनभेद नहीं हैं। शिवसेना हमेशा अपनी जनहित की नीति और जनता के सुख - दुःख के विषय पर अत्यंत जागरूक होकर चलती आई है। वह भाजपा के साथ सरकार में है तो क्या हुआ ,जब भी बात जनता के हितों की होगी वह अपना पक्ष जरूर रखेगी। इसमें बुरा लगाने की बजाय भाजपा के लोग शिवसेना की जनहित की बातों को गंभीरता से लेते रहें। अगर कहीं कमी नजर आएगी तो हम बार-बार बोलेंगे। जनता का विषय हमारे लिए हर बात , हर सवाल से ज्यादा जरूरी है।     उत्तर मुंबई भाजपा के जिला मंत्री अमर मिश्रा के अनुसार शिवसेना अब तक बड़े भाई वाले रोल में थी, पर अब छोटा भाई बननेवाली स्थिति को शायद बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। भाजपा ने भारी जन समर्थन के साथ जब बता दियाकि बड़ा भाई वह है तो कुछ लोगों को ये बरदाश्त नहीं हो रहा है।शिवसेना को चाहिए कि बड़े और छोटे का मतभेद भूलकर महाराष्ट्र और राष्ट्र के विकास में मिल - जुलकर काम करे। अभी तो राष्ट्र और महाराष्ट्र का असली विकास होना शुरू हुआ है।   युवा व्यवसाई और समाजसेवी अनिल ठाकुर के अनुसार एक परिवार में अगर दो भाई हैं तो उन्हें मिल - जुलकर रहना होता है। जिसमें बड़ा या छोटा जैसी भावना आनी ही गलत है। परिवार चलाने के लिए भाइयों को सारी तकरार भुलाकर उसके हित में निर्णय लेने होते हैं। किसी भी तरह की खिलाफत , बयानबाजी या तू - तू ,मैं - मैं से सभी भाइयों को बचना चाहिए। वैसे कांग्रेस और राष्ट्रवादी जब एक होकर सत्ता सुख के उपभोग में थे तब उनमें भी इस तरह की बातें होतीं रहतीं थीं। इस विषय को अधिक तूल देने की जरूरत मुझे तो नहीं लग रही।   एन.यस.यू.आइ. के पूर्व जनरल सेक्रेटरी और युवा नेता एडवोकेट आशीष शुक्ला ने सीधी चोट करते हुए कहा है कि भाजपा और शिवसेना आदि दोनों दलों का वोट हिंदुत्व पर आधारित रहा है। ऊपर से शिवसेना का अधिकांश मराठी वोट बैंक भी भाजपा के पाले में आ जाने से वह अपने ही साथी दल के खिलाफ अक्सर बयानबाजी कर अपनी झल्लाहट का परिचय देती रहती है। शिवसेना को शायद लग रहा है कि उसने मराठी वोटों का अपना बेस खो दिया है। वह सिकुड़ गई है। इसी चक्कर में वह बार - बार बयानबाजी करके अपने को अब भी साथी दल से सुपर दिखाने के लिए यह सब करती रहती है। भाजपा की भी यही हालत है कि वह अब न शिवसेना को उगल पा रही है और न निगल पा रही है। जनता भी इस तरह के मामलों पर विशेष निगाह रख रही है। समय आने पर दोनों दलों को वो जवाब देगी।   कांग्रेस के नेता प्रेमचन्द्र चौधरी का मत है कि सरकार बनाने के लिए भाजपा को समर्थन देने के शरद पवार के बयान के बाद बौखलाई हालत में शिवसेना ने भाजपा का दामन थामने का निर्णय लिया था। अब शायद वह कहीं खुद को कमजोर पा रही है इसलिए वह भाजपा से अब भी अधिक मजबूत है यह दर्शाने के लिए समय - समय पर बयानबाजी के पैतरे आजमाती रहती है।    वहीं समाजसेवी प्रदीप शाह का कहना कि जो कांग्रेस और राष्ट्रवादी के लोग सत्ता में साथ होने के दौरान कर रहे थे वही अब भाजपा और शिवसेना वाले भी कर रहे हैं। जनता का दुःख , उसकी वेदना और जरूरतें कोई नहीं देख रहा है। पहले राजनीति में नैतिकता तो आये। तभी राजनीति, राष्ट्रनीति बनकर देश के लोगों का भला कर पाएगी।     Mumbai Hindi News
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